बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर कविताएँ
बेटी बचाओ कविता 2-
बेटी जग का आधार
जब माँ हीं जग में न होगी
तो तुम जन्म किससे पाओगे ?……..
जब बहन न होगी घर के आंगन में
तो किससे रुठोगे, किसे मनाओगे ?………
जब दादी-नानी न होगी
तो तुम्हें कहानी कौन सुनाएगा ?…
जब कोई स्वप्न सुन्दरी हीं न होगी
तो तुम किससे ब्याह रचाओगे ?……
जब घर में बेटी हीं न होगी
तो तुम किस पर लाड लुटाओगे ?…..
जिस दुनिया में स्त्री हीं न होगी
उस दुनिया में तुम कैसे रह पाओगे ?……
जब तेरे घर में बहु हीं न होगी
तो कैसे वंश आगे बढ़ाओगे ?…..
नारी के बिन जग सूना है
तुम ये बात कब समझ पाओगे ?….
बेटी बचाओ कविता 2-
बेटी है, तो है सृष्टि सारी
कभी बेटी, कभी बहन, कभी पत्नी, तो कभी माँ है नारी
पुरुष जिसके बिना असहाय है, ऐसी है नारी
कभी ममता की फुलवारी, तो कभी राखी की क्यारी है नारी
सृष्टि जिसके बिना थम जाए, ऐसी है नारी
पुरुषों की पूरी भीड़ पर अकेली भारी है नारी
जो सृष्टि को जलाकर राख कर दे, ऐसी चिंगारी है नारी
बेटी हो तो…….. पिता की राजदुलारी है नारी
माँ हो तो………. सन्तान पर हमेशा भारी है नारी
बहन हो तो……. भाई की लाडली है नारी
पत्नी हो तो…….. पति की जान है नारी
पुरुष हमेशा अधूरा तो…….. हमेशा पूरी है नारी
सृष्टि जिस पर घूम रही, वह धुरी है नारी
जब गर्भ में नहीं मरोगे, तभी तो तुम्हारी है नारी
जब नारी है………… तभी तो है ये सृष्टि सारी