देशभक्ति की कवितायें

देशभक्ति की कवितायें 

देशभक्ति की कवितायें
1-भारत का गौरव ….

यह देख दशा तुम भारत की, जो मानवता का मुकुट रहा
जिसमें अशांति का नाम न था, यह देखो गर्त में गिरने चला
फिर भी अगर तुम अचेत रहो, फिर इससे ग्लानि और क्या हो………….
तुम फिर भी यों हीं बैठे रहो, और माता की दुर्दशा हो ?………………………….यह तुम सोचो क्या यह ग्लानि नहीं, मानवता की यह हानि नहीं
मानव तुम पर थूकेंगे हीं, तुमको उलाहना देंगे हीं
मानव तुम भी सचेष्ट रहो, ताकि मर्यादा धूल न हो…………………..
पहले बुराइयाँ दूर करो, फिर नव समाज निर्माण करो………………………….

भारत में अनेक बुराई है, अच्छे लोगों ने राजनीति से दूरी बनाई है
सत्ता स्वार्थियों के पास है गिरवी पड़ी, इसलिए गरीबों पर आफत बड़ी
अच्छे आदर्शों को हमने भुला दिया, इसलिए अपना सबकुछ गंवा दिया………….
कन्या अब भी अबला है, न जाने नारी को क्यों मिली यह सजा है………………………….
पहले तुम कुप्रथाओं का नाश करो, ताकि दुखियन का भी उद्धार तो हो
तुम सदा-सदा सचेष्ट रहो, ताकि भारत में कोई दुखी न हो
इस पर न तुम्हारा ध्यान गया, भारत का गौरव मिट हीं गया
मैं फिर कहता हूँ मनन करो, भारत का गौरव प्राप्त करो…….
तुम मनन करो…….. तुम मनन करो………………………….


2-मैं भारत माता हूँ

इतने व्यस्त हो गए तुम, कि तुम्हारा देशप्रेम साल में 2 बार जगता है
उन सैनिकों के बारे में सोचो, जिनके जीवन का पल-पल देश के लिए लगता है
कोई देश के लिए शान से मरता है………….
और एक तुम हो, जिसे देश के लिए जीना भी मुश्किल लगता है ?
On field Players और On Screen Heroes आदर्श बन गए हैं तुम्हारे
उन लोगों को तुम याद तक नहीं करते, जो Real Life में Heroes हैं
जरा सोचो इन खोखले Role Models ने तुम्हें क्या दिया है अबतक ?
तुम अपने आदर्श बदल लो, इससे पहले कि औंधे मुँह गिरो तुमपार्टी विरोधियों के विरुद्ध डटकर खड़े हो जाते हो तुम
राष्ट्र विरोधियों के विरुद्ध क्यों नहीं आवाज उठाते हो तुम ?
राजनीति, सत्ता सुख पाने का जरिया है जिनके लिए उन्हें क्यों पूजते हो तुम ?
इससे पहले कि देर हो जाए, राष्ट्रनीति को राजनीति का विकल्प बना लो तुम
न एक शिक्षा नीति, न समान नागरिकता नीति
ये तो है अंग्रेजों की बांटों और राज करो नीति
क्यों किसी और से बदलाव किसी उम्मीद करते हो तुम……
जब खुद देश के लिए……. कुछ नहीं करते हो तुम ? ? ?
मैं भारत माता हूँ तुम्हारी…. मैं आज भी रो रही हूँ
क्योंकि तुम आज भी मोह की नींद में सो रहे हो
हो सके तो, अब भी जाग जाओ तुम……..
इससे पहले कि सब कुछ खत्म हो जाए, खुद को पहचान जाओ तुम.

3 -भारत माता की शान हूँ मैं 

भारत माता की शान हूँ मैं, ए पी जे अब्दुल कलाम हूँ मैं
जो वन्देमातरम कहकर, गर्व से फूल जाए वो मुसलमान हूँ मैं
मैंने देखा था अजब नजारा, जब मैं मौत की नींद में सोया था…..
तो हिंदु या मुसलमान नहीं, पूरा हिन्दुस्तान रोया था……………..
जो कर सकता था, वो सब कुछ किया मैंने अपने देश के लिए
अपने जीवन का एक-एक पल जीया अपने देश के लिए
अब मेरे हिन्दुस्तान को संवारो और सम्भालो तुम…….
देश के दुश्मनों से मेरे देश को बचा लो तुम……………….
मेरे भारत को फिर विश्व गुरु बनाना है तुम्हें
भारत को फिर दुनिया का सिरमौर बनाना है तुम्हें
जो सपने मैंने अपने भारत के लिए देखे हैं………….
उन सपनों को सच कर दिखाना है तुम्हें………………
याद रखो, जो देशभक्त हो वही हिंदु या मुसलमान होता है
जो गद्दार हो, वो तो बस गद्दार होता है… इस धरती पर भार होता है
हर गली-मुहल्ले में देशभक्ति की अलख जगा दो तुम…..
हर देशभक्त को अब्दुल कलाम बना दो तुम…………

4- स्वतन्त्रता दिवस कविता

अगर आजादी को बचाना चाहते हो, तो देश के लिए लहू बहाना होगा
जो देश की खातिर जीते-मरते हैं, उनके आगे अपना शीश झुकाना होगा
जो चाहते हो, जय हिन्द का नारा बुलंद रहे, तो तुम्हें सुभाष बन जाना होगा…………
अगर अकबर को उसकी औकात दिखानी है, तो खुद को प्रताप बनाना होगा………………
मुगलों से लोहा लेना है, तो शिवाजी बनकर आना होगा
गौरी को मौत की नींद सुलानी है, तो पृथ्वीराज सा बाण चलाना होगा
अगर अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने हो, तो लक्ष्मीबाई बन जाना होगा…………………….
कभी मंगल, कभी भगत, तो कभी आजाद बनकर धरती में आना होगा…………………..
जाति धर्म देखे बिना, देशद्रोहियों को अपने हाथों से मिटाना होगा
नई पीढ़ी को अभिमन्यु सा, गर्भ में देशभक्ति का पाठ पढ़ाना होगा
तुम्हें व्यक्तिवाद छोड़कर राष्ट्रवाद अपनाना होगा………………………
हर व्यक्ति में भारतीय होने का स्वाभिमान जगाना होगा………………………..
लोकतंत्र को स्त्तालोलुपों से मुक्त कराना होगा
देशभक्ति को भारत का सबसे बड़ा धर्म बनाना होगा
वीरता की परम्परा को आगे बढ़ाना होगा……………………….
हर भारतीय को देश के लिए जीना सिखाना होगा……………

5-आजादी की मध्यरात्रि

आजादी के छह दशक बीते, पर अब तक सूरज उगा नहीं
कहने को हम आजाद हो गए, पर पूर्ण स्वराज मिला नहीं
लक्ष्मीबाई की धरती में, माँ-बेटियाँ अब भी सुरक्षित नहीं
ऋषियों की इस तपोभूमि में, हर कोई अब भी शिक्षित नहीं
शास्त्री-सुभाष की मृत्यु का सत्य देश से छुपाया गया है
और मुगलों का इतिहास, बच्चों को रटाया गया है
हिन्दुओं को जाति, भाषा और रोटी के नाम पर लड़ाया जा रहा है
और अहिंसा के नाम पर जनता को कायर बनाया जा रहा है
सैनिक देश की आजादी बचा रहे हैं, और अहिंसा का गुण गाया जा रहा है
अर्धसत्य बेचा जा रहा है, और लोगों से सच को छुपाया जा रहा है
देश के कर्णधार खो गए हैं कहीं, जागने से पहले सो गए हैं कहीं
क्रांति की मशाल बुझ गई है, और अब तारणहार कोई भी नहीं
क्रांतिकारियों को भुला दिया गया है, एक व्यक्ति को आजादी का जनक बना दिया गया है
लाखों परिवारों के त्याग को भुला दिया गया है, एक परिवार को सबसे बड़ा बना दिया गया है
हिंदुत्व की जन्मभूमि में हिंदु धर्म को साम्प्रदायिक बताया जा रहा है
धर्मनिर्पेक्षता के नाम पर हिन्दुओं को धर्म विमुख बनाया जा रहा है
यही सही वक्त है देशभक्तों के जगने का
देश के लिए इसके बेटों के जीने-मरने का
यही सही वक्त है, सोए देश को नींद से जगाने का
यही सही वक्त है, आजादी को सच्चे अर्थों में पाने का
यही सही वक्त है, विश्व गुरु बन जाने का
यही सही वक्त है, दुनिया को फिर से राह दिखाने का
यही सही वक्त है, एक साधारण मानव से कर्मवीर बन जाने का
यही सही वक्त है, क्रांति की मशाल को फिर से जलाने का

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