दिल्ली के मशहूर दर्शनीय स्थल Delhi ke Darshaniya Sthal in Hindi
बहाई मंदिर Lotus Temple
कालकाजी मंदिर के पीछे स्थित बहाई प्रार्थना केंद्र जिसे लोटस टेम्पल (अंग्रेजी में) या कमल मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर एशिया महाद्वीप में बना एकमात्र बहाई प्रार्थना केंद्र है। भारत के अलावा पनामा, कंपाला, इल्लिनॉइस, फ्रैंकफर्ट, सिडनी और वेस्ट समोआ में इसके केंद्र हैं। ये सभी केंद्र बहाई आस्था के प्रतीक हैं और अपने अद्वितीय वास्तु शिल्प के लिए प्रसिद्ध हैं। 26 एकड़ में फैले इस मंदिर का निर्माण 1980 से 1986 के बीच हुआ था। इसे बनाने में कुल एक करोड़ रु. की लागत आई थी। श्रद्धालुओं के लिए इसे दिसंबर 1986 में खोला गया था। तालाब और बगीचों के बीच यह मंदिर ऐसे लगता है जसे पानी में कमल तैर रहा हो। इसका डिजाइन फरीबर्ज सभा ने बनाया था। कमल भारत की सर्वधर्म समभाव की संस्कृति को दर्शाता है। मंदिर के प्रार्थना हॉल में कोई मूर्ति नहीं है। किसी भी धर्म के अनुयायी यहां आकर ध्यान लगा सकते हैं। मंदिर में एक सूचना केंद्र भी है।
अक्षरधाम मंदिर
नई दिल्ली में बना स्वामिनारायण अक्षरधाम मन्दिर हिन्दुओं का विशालतम सांस्कृतिक तीर्थ है। इसे ज्योतिर्धर भगवान स्वामिनारायण की स्मृति में बनवाया गया है। यह परिसर 100 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। दुनिया का सबसे विशाल हिंदू मन्दिर परिसर होने के नाते 26 दिसम्बर 2007 को यह गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में शामिल किया गया। देश विदेश से इस मंदिर के दर्शनार्थी आते रहते हैं |
गुरुद्वारा बंगला साहिब Gurudwara Bangla Sahib
गुरु हरिकिशन साहिब को समर्पित यह गुरुद्वारा सिक्खों का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। गुरु हरि किशन सिक्खों के आठवें गुरु थे। प्रारंभ में गुरुद्वारा बंगला साहिब एक हवेली थी जहां गुरु हरि किशन 1664 में अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान रुके थे। कहा जाता है कि उनके दिल्ली प्रवास के दौरान यहां महामारी फैल गई थी। उस समय गुरु हरि किशन ने बिना किसी भेदभाव के गरीब और असहाय लोगों की सेवा की। उनकी मृत्यु छोटी उम्र में ही हो गई थी क्योंकि उन्होंने शहर से महामारी हटाने के लिए सारी बीमारियां अपने ऊपर ले ली थी। गुरुद्वार के परिसर में एक माध्यमिक स्कूल, संग्रहालय, किताबों की दुकान, पुस्तकालय, अस्पताल और एक पवित्र तालाब भी है। देश-विदेश से श्रद्धालुओं का यहां आना जाना लगा रहता है।
दिगंबर जैन मंदिर Sri Digambar Jain Lal Mandir
दिल्ली का सबसे पुराना जैन मंदिर लाल किला और चांदनी चौक के सामने स्थित है। इसका निर्माण 1526 में हुआ था। वर्तमान में इसकी इमारत लाल पत्थरों की बनी है। इसलिए यह लाल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहां कई मंदिर हैं लेकिन सबसे प्रमुख मंदिर भगवान महावीर का है जो जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे। यहां जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की प्रतिमा भी स्थाकपित है। जैन धर्म के अनुयायियों के बीच यह स्थारन बहुत लोकप्रिय है। यहां का शांत वातावरण लोगों को अपनी ओर खींचता है।