डॉ.राजेंद्र प्रसाद जी की आत्मकथा : Dr. Rajendra Prasad Biography in Hindi
डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय
- जन्म - 3 दिसम्बर, 1884
- निधन - 28 फरवरी 1963
- कार्यकाल - 26 जनवरी 1950 से 13 मई 1962
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे. इनका जन्म 3 दिसम्बर, 1884 को कुआँगाँव, अमोढ़ा (उत्तर प्रदेश) में हुआ था वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से थे जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में भी अपना योगदान दिया था जिसकी परिणति 26 जनवरी 1950 को भारत के एक गणतंत्र के रूप में हुई थी। पूरे देश में अत्यन्त लोकप्रिय होने के कारण उन्हें राजेन्द्र बाबू या देशरत्न कहकर पुकारा जाता था।
राजेन्द्र बाबु के पिता सहाय संस्कृत और फारसी के विद्वान थे. इनकी माता कमलेश्वरी देवी एक धर्मपरायण महिला थी. राजेन्द्र बाबु का विवाह 13 वर्ष की उम्र में राजवंशी देवी से हो गया. फिर 1915 में उन्होंने स्वणॆ पद के साथ एलएलएम की परीक्षा पास की और बाद में उन्होंने लाँ के क्षेत्र में डाक्ट्रेट की उपाधि भी हासिल की. राजेंद्र बाबु को फारसी, उर्दू, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती और बंगाली भाषा से पूरी तरह परिचित थे. 1934 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मुंबई अधिवेशन में अध्यक्ष चुने गए. नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने पर कांग्रेस अध्यक्ष का पदभार उन्होंने एक बार पुनः 1939 में सम्भाले.
डॉ राजेंद्र प्रसाद जी पर निबंध : भारत के स्वतंत्र होने के बाद संविधान लागू होने पर उन्होंने देश के पहले राष्ट्रपति का पदभार संभाला उन्होंने कभी भी अपने संवेधानिक अधिकारों में प्रधानमंत्री या कांग्रेस को दखलंदाजी का मोका नहीं दिया. 12 वर्षो तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने पश्चात उन्होंने 1962 में अवकाश की घोषणा की. फिर उन्हें भारत सरकार की तरफ से सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया.
राजेंद्र बाबु का निधन 28 फरवरी 1963 में पटना के निकट सदाकत आश्रम में हुआ.
डॉ राजेंद्र प्रसाद पर हम लोग को गर्व है और ये सदा राष्ट्र को प्रेरणा देते रहेंगे.