पवनपुत्र हनुमान सबसे श्रेष्ठ रूद्र अवतार थे रामायण के अनुसार हनुमान बह्रमचारी बताए गए लेकिन बहुत कम लोग इस बात को जानते है कि बजरंगबली का विवाह हुआ था। हनुमान मात्र ऐसे देव है जिनके पास सभी देवताओं की शक्तियाँ है और उनका संचालन खुद करते है उन्हें किसी दोष का असर नहीं होता, वही शास्त्रों के अनुसार हनुमान सृष्टि के अंत तक जीवित रहते है।
सभी जानते है कि जब हनुमान बालक थे तो वे सूर्य को फल समझकर खाने के लिए उड़े थे जिससे भगवान सूर्य ने उनकी चेतना छीन ली और जब पवन देव को इस बात का ज्ञान हुआ तो उन्होंने समस्त लोगो की वायु छिन ली और हनुमान से लिपट गए थे उस समय सभी देव ने महाबली हनुमान की वीरता को देख उन्हें अपनी सारी शक्तियाँ दे दी।
सूर्य ने हनुमान को 9 तरह की विद्याओं का ज्ञान देने का आशीर्वाद दिया था जब हनुमान बड़े हुए, तो उन्होंने सूर्य से 5 तरह की विद्या ग्रहण करी लेकिन 4 विद्या सिर्फ विवाहित को ही सिखायी जा सकती थी। अब सूर्य देव चिंता में पड़ गए कि हनुमान को दूसरी विद्या कैसे सिखाए। सूर्य के लिए बड़ा धर्म संकट हुआ इसलिए उन्होंने हनुमान को विवाह करने का आग्रह किया।
लेकिन कौन ऐसी कन्या होगी जो हनुमान से विवाह के लिए तैयार हो जाये, तभी सूर्य ने अपनी तपस्वी पुत्री सुवर्चला का विवाह हनुमान से कर लिया जो सिर्फ विद्या ग्रहण के लिए किया गया था इसके बाद सूर्य की पुत्री तपस्या में लीन हो गयी थी और इस तरह हनुमान ने अपना बह्रमचर्य व्रत कभी नहीं तोडा था और वह 4 विद्या भी अपने गुरु सूर्य से सिख ली।
इस बात का प्रमाण पराशर सहिंता में दिया गया है जिसका दूसरा प्रमाण आन्ध्र प्रदेश के खम्मम जिले में बना हनुमान जी का यह मंदिर है जहाँ हनुमान और सूर्य देव की पुत्री सुवर्चला की पूजा की जाती है।