ये है दानवीर कर्ण के वो 3 दान, जिसने उन्हें बनाया इतिहास का सबसे महान दानवीर

ये है दानवीर कर्ण के वो 3 दान, जिसने उन्हें बनाया इतिहास का सबसे महान दानवीर

सूद्र पुत्र राधेय, सूर्य पुत्र कर्ण, कुंती पुत्र कर्ण, मृत्युंजय कर्ण, दानवीर कर्ण ऐसे कई नामों से यह महारथी जाना जाता हैं। महाभारत इतिहास का सबसे बड़ा योद्धा। महारथी कर्ण महाभारत के अभागे पात्रों में से एक था। उन्होंने जीवन में कई कष्ट सहें हैं। फिर भी वो कभी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटे। उनका एक बेहद ही ख़ास गुण था, वो यह की दानवीर होने का। उनसे बड़ा दानवीर आज तक इतिहास में कोई भी नहीं हुआ हैं। उनके दानवीर के किस्से पूरे भारतवर्ष में प्रचलित हैं। आज हम आपके लिए वैसे ही कुछ किस्से लेकर आए हैं, जो उन्हें बनाते हैं इतिहास का सबसे महान दानवीर।

1.कवच और कुंडल का दान

देवराज इंद्र भिक्षु का भेष धारण कर सूर्यपुत्र कर्ण के पास जाते हैं, और उनसे कवच और कुंडल की मांग करते हैं। सूर्यपुत्र कर्ण ये जान गए थे कि ये कोई और नहीं स्वयं देवराज इंद्र हैं। जो अर्जुन की रक्षा के लिए उनसे कवच और कुंडल की मांग कर रहे हैं। फिर भी सूर्यपुत्र कर्ण ने उनकी अपनी मर्ज़ी और ख़ुशीसे उस भिक्षु अर्थात देवराज इंद्र को कवच और कुंडल का दान कर दिया।

2.माता कुंती को दिया हुआ 5 पांडवों की सलामती का दान

महाभारत के युद्ध के पूर्व माता कुंती अपने पाँचो पुत्रों की सलामती के लिए सूर्यपुत्र कर्ण के पास जाती हैं। और कर्ण को उनकी असली पहचान बताती हैं। और पांडवों के दल में शामिल हो जाने को कहती हैं। लेकिन सूर्यपुत्र कर्ण उनका यह प्रस्ताव अस्वीकार करते हैं। और अपनी माता कुंती से वादा करते हैं की इस युद्ध के पश्चात भी उसके पांच पुत्र अर्थात 5 पांडव जीवित रहेंगे। वो धनुरधर अर्जुन को छोड़कर किसी और पांडू पुत्रों का वध नहीं करेगे।

3.मृत्यु शैय्या पर होते हुए भगवान श्रीकृष्ण को दिया हुआ दान


जब सूर्यपुत्र कर्ण अपनी आख़री सांसे ले रहे होते हैं अर्थात मृत्यु शैय्या पर होते हैं, तब भगवान श्रीकृष्ण उनकी परीक्षा लेने हेतु उनके पास जाते हैं। और उनसे दान मांगते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की इस बात पर कर्ण कहते हैं की उनके पास देने के लिए कुछ भी नहीं हैं। तब भगवान श्रीकृष्ण उन्हें उनका सोने का दांत मांगते हैं। तब सूर्यपुत्र कर्ण मृत्यु शैय्या पर होने के बावजूद पास पड़े पत्थर से अपना सोने का दांत तोड़कर देते हैं। पर भगवान श्रीकृष्ण ख़ून से सने उस सोने के दांत को लेने से इंकार करते हैं। तब कर्ण अपने धनुष से एक तीर चलाकर पानी निकालते हैं, और वो ख़ून से सना हुआ सोने का दांत धोते हैं। और फिर वो दाँत भगवान श्रीकृष्ण को देते हैं। इस प्रकार सूर्यपुत्र कर्ण अर्थात दानवीर कर्ण अपने अंतिम समय में भी दान करते हैं।

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