भारत के उत्तर पूर्व में स्थित है नागालैंड, जिसकी आबादी लगभग 20 लाख है. लगभग
सभी के मन में यह सवाल होगा कि नागालैंड को भारत का सबसे खतरनाक राज्य क्यों कहा? दरअसल हम आज के विषय में नागालैंड के बारे में कुछ बेहद रोचक भी कह सकते हैं और आश्चर्यजनक भी, तथ्य लेकर आए हैं. जिन्हें जान आप खुद
नागालैंड की विचित्रता को समझ सकेंगे.
भारत का सबसे रहस्यमयी राज्य जो आपको हैरत में डाल देगा नागालैंड का ये पहलू आपको हैरान जरूर करेगा-
- आज भी नागालैंड में कुछ ऐसी जनजातियां रहतीं हैं जिनका इतिहास नरभक्षण से जुड़ा है और माना जाता है यहां गुप्त रूप से कुछ क्षेत्रों में नरभक्षी समुदाय सक्रिय हैं.
- नागालैंड की कई जनजातियां कुत्ते के मांस का सेवन करतीं हैं, यह तथ्य अपने आप में बेहद विचलित करने वाला है. यहां व्यापक रूप से कुत्ते के मांस को खाया जाता है और यह प्रथा सदियों से नागालैंड वासियों की परंपरा का हिस्सा है.
- नागालैंड को यदि आप कमजोर व पिछड़ा समझने की भूल कर रहे हैं तो ये राज्य यहां भी आपको चकमा दे देगा. नागालैंड में शिक्षा का प्रतिशत 85% है जो भारत के कई बड़े व विकसित राज्यों से बेहतर है.
- नागालैंड के लोगों को उनकी पुरानी परम्पराओं के पालन के लिए जाना जाता है ये लोग आज भी पैरों में बड़े-बड़े कड़े आदि पहनते हैं.
- नागालैंड के लोग सपनों को महज सपना नहीं मानते बल्कि उसमें छुपे रहस्यों को खोजते हैं. नागालैंड में लोग सपनों के जरिये भविष्य में झांकने की कोशिश करते हैं.यहां सर्वाधिक बोले जाने वाली भाषा 'आओ' है और हैरान करने वाली बात ये है कि आओ में सिर्फ 12% लोग ही बात करते हैं.
एक नजर नागालैंड के इतिहास पर-
मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र आदि जैसे अन्य राज्यों की तरह नागालैंड में कोई एक अलग या विशेष भाषा नहीं बोली जाती. वजह है यहां 100 से अधिक तरह की जनजातियां, आदिवासियों का निवास है जिनकी अपनी अलग भाषा है.
नागालैंड में भारत के अन्य राज्यों की तरह हिन्दू या मुस्लिम बहुसंख्यक नहीं हैं. यहां हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही अल्पसंख्यक हैं जबकि ईसाई धर्म की अनुयायी 80% से अधिक जनसंख्या है.
ऐसा शायद पहली बार हुआ था कि भारत और ब्रिटिश सेना ने साथ में किसी से युद्ध किया हो. दरअसल 1944 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ऐसा हुआ था और पराजय हुई थी जापानी सेना की. इस युद्ध को 'बैटल ऑफ कोहिमा' के नाम से जाना जाता है.
नागालैंड को त्योहारों की धरती भी कहा जाता है, वर्ष भर रंग-बिरंगी चादरों को शरीर पर लपेटे यहां के लोग कोई न कोई त्योहार मनाते रहते हैं.