राम कभी रावण को नहीं मार पाते, अगर यह श्राप नहीं लगता
बहुत से लोग कहते है कि इंसान कितना भी बलवान क्यों नहीं हो जाता लेकिन उसे कभी अभिमान नहीं करना चाहिए इसी बात का जीता जागता उदारण रावण था। रावण की पहली माता के पुत्र कुबेर थे उनके पास धन और ऐश्वर्य की कोई कमी नहीं थी लेकिन इस बात से रावण को जलन होती थी इसलिए उसने अपने भाई कुबेर से सारा धन छीन लिया और जो रावण के पास पुष्पक विमान था वह भी कुबेर से छीना हुआ था।
लेकिन यह अपराध करने के बाद भी रावण खुद को छोटा राजा ही समझता था इसलिए उसने विश्व को जितने का मन बना लिया, वह चाहता था कि पूरी दुनिया सिर्फ उसी की पूजा करे लेकिन देवता रावण की इच्छा को अच्छे से जान चुके है। रावण महादेव को अपना आराध्य देव इसलिए मानता था कि उसके पिता विश्राव बाह्रमण थे और ऋषि का कर्तव्य होता है कि वो अपने पुत्रों को वेद शास्त्र का अभ्यास करवाए। रावण ने अपने पिता की आज्ञा अनुसार वेदों का निपुण अध्यन भी किया लेकिन उसका अभिमान खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था।
रावण ने महादेव और बह्रमा की कठिन तपस्या करके अस्त्र-शस्त्र का ज्ञान ले लिया था परन्तु बह्रमा ने उसे कभी अमरता का वरदान नहीं दिया क्योंकि अगर ऐसा होता तो पुरे संसार में दैत्यों का साम्राज्य स्थापित हो जाता। भगवान से वरदान लेने के बाद रावण अपने आप को अधिक ताक़तवर समझने लग गया था इसलिए वह पुरे विश्व पर विजय प्राप्त करने के लिए अपनी सेना के साथ निकल पड़ा।
इस तरह रावण ने अनेक राजाओं को पराजित कर दिया लेकिन राजा इक्ष्वाकु वंस के राजा अनरण्य को पराजित नहीं कर सका, जो अयोध्या के राजा थे। जब रावण के प्रहार से अनरण्य घायल हो चुके थे इसलिए रावण उनका उपहास करने लगा तब राजा से रावण को श्राप दे दिया कि तू जिस वंश का उपहास कर रहा है उसी रघुकुल वंश में दशरथ का पुत्र राम जन्म लेगा जो तेरी मृत्यु का कारण बनेगा। माना जाता है कि रावण इस श्राप से काफी डर गया था इसलिए उसने श्री राम के जन्म से पहले माता कौशल्या को बंदी बना दिया था लेकिन राजा दशरथ ने उनकी रक्षा की थी।