अमरीश पुरी के बारे में रोचक जानकारियां

अमरीश पुरी के बारे में रोचक जानकारियां

अमरीश पुरी के बारे में रोचक जानकारियां


हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में जब भी विलेन का नाम लिया जाता है तो 2 नाम जरूर आते हैं, गब्बर सिंह और मोगैम्बो. आइए जानते हैं इस महान एक्टर अमरीश पुरी की कुछ खास बातें.

1.अमरीश पुरी का जन्म 22 जून 1932 को नवांशहर (जलंधर, पंजाब) में हुआ था.

2: अमरीश पुरी का पूरा नाम अमरीश लाल पुरी था . इनके बड़े भाई भी मशहूर अभिनेता मदन पुरी थे.

3: अमरीश पुरी ने शिमला के बी एम कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की थी.

4: अमरीश पुरी को शेखर कपूर की फिल्म मिस्टर इंडिया के विलेन मोगैम्बो के नाम से जाना जाता है.

5: लगभग 40 साल की उम्र में अमरीश पुरी ने बॉलीवुड में डेब्यू किया था, फिल्म का नाम रेशमा और शेरा था उसके बाद अमरीश पूरी ने लगभग 400 फिल्मों में काम किया था.

6: विदेशों में अमरीश पुरी को लोग मोला राम के नाम से जानते हैं, उन्होंने 1984 में स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म इंडिआना जोंस एंड द टेम्पल ऑफ डूम में मोला राम का किरदार निभाया था. स्पीलबर्ग हमेशा कहा करते थे की उनके लिए अमरीश पुरी पसंदीदा विलेन थे.

7: फिल्म इंडिआना जोंस एंड द टेम्पल ऑफ डूम के लिए अमरीश पुरी ने अपने बाल शेव कराए थे और लोगों ने उनके अवतार को इतना सराहा की उन्होंने अपनी क्लीन शेव हेड की स्टाइल रख ली.

8: अमरीश पुरी फिल्म बाबुल में ओम पुरी के रोल के लिए ओरिजनल चॉइस थे.

9: अमरीश पुरी का पहले स्क्रीन टेस्ट खराब गया था जिसकी वजह से उन्हें मिनिस्ट्री ऑफ लेबर में काम करना पड़ा. उसके बाद अमरीश ने स्टेज एक्टिंग और काफी बाद में फिल्मों में हिस्सा लिया.

ये हैं अमरीश पुरी के 11 यादगार किरदार



22 जून 1932 को जन्‍मे अमरीश पुरी बॉलीवुड के फेमस विलेन और चरित्र अभिनेता मदन पुरी के छोटे भाई थे। उन्‍होंने अपने करियर की शुरूआत तो निशांत और मंथन जैसी आर्ट फिल्‍मों में करेक्‍टर रोल्‍स की थी पर जब 1984 में उन्‍हें स्‍टीफन स्‍पिलबर्ग की फिल्‍म इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ़ डूम में मोलाराम का करेक्‍टर मिला तो उनका बाल्‍ड लुक फेमस हो गया और कहते हैं कि इसीलिए उन्‍हें विलेन के करेक्‍टर भी खूब मिले। वैसे चाहे खलनायक हो या करेक्‍टर रोल अमरीश ने अपने दमदार अभिनय से उसमें जान फूंक दी। आइये जाने उनके दस दमदार किरदारों के बारे में।

बाबा भैरोनाथ: 

सबसे पहले बात करते हैं फिल्‍म नगीना में उनके तांत्रिक बाबा भैरों नाथ के चरित्र की। फिल्‍म में नाग मणि के पीछे पड़ा भैरोनाथ जब पराजित होता है तो नागिन को उसके सारे कष्‍टों से मुक्‍त हो कर मानवी होने का आर्शिवाद दे कर मरता है। फिल्‍म में अमरीश के गैटअप ने एक अलग मैनेरिज्‍म क्रिएट कर दिया था।

मोगैम्‍बो:

फिल्‍म मिस्‍टर इंडिया के विलेन मोगैम्‍बो के बारे में हर बच्‍चा आज भी जानता है। और कोई भी जब अपनी खुशी जाहिर करता है तो अब मोग्‍ैम्‍बो खुश हुआ कह कर ही जताता है। ये डायलॉग अब आम आदमी के लिए कहावत बन चुका है।

जनरल डांग:

फिल्‍म तहलका में अपना एक अलग देश डांगरीला बसा कर लोगों पर जुल्‍म और अत्‍याचार की इंतिहा करने वाला संगीत प्रेमी जनरल डांग भी लोगों के जहन में अब तक ताजा है।

चुनिया:

दो दोस्‍तों की कहानी सौदागर में दोस्‍तों वीर और राजेश्‍वर के बीच झगड़ा कराने वाला दुष्‍ट चूनिया मामा बने अमरीश को कौन भूल सकता है। शकुनी मामा जैसे चूनिया के इस किरदार में अमरीश ने लोगों को अपने से नफरत करने के लिए मजबूर दिया था।

बैरिस्‍टर इंद्रजीत चढ्ढा:

फिल्‍म दामिनी के गुस्‍सैल और चीखने चिललाने वाले बैरिस्‍टर इंद्रजीत चढ्ढा को कौन भूल पाया है, जिससे सनी देयोल कहता की चढ्ढा जज ऑर्डर ऑर्डर करता रहेगा और तू पिटता रहेगा।

चौधरी बल्‍देव सिंह:

ऐसा नहीं है कि अमरीश ने अपनी छाप सिर्फ विलेन के चरित्र में ही छोड़ी है। अगर यकीन नहीं तो फिल्‍म दिल वाले दुल्‍हनिया ले जायेंगे कड़क पिता चौधरी बल्‍देव सिंह के मुलायम दिल को याद कीजिए जो ऐ मेरी जोहरा जंबी गा कर अपनी बीबी से रोमांस करता है और अपनी बेटी सिमरन को उसकी जिंदगी जीने की आजादी भी देता है।

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