प्रिय दोस्तों आज के इस लेख में हम आपको मूली खाने के अनेकों फायदें के बारे में बतायेंगें. दोस्तों मूल हमारे सेहत के लिए काफी फायदेमंद है लेकिन इसके प्रयोग करने के अगल-अलग तरीके है अगर मूली का प्रयोग सही तरीके से किया जाये तो ये किसी औषधी से कम नहीं है आइये जानते है मूली के फायदें।
मधुमेहः मूली खाने से या इसका रस पीने से मधुमेह में लाभ होता है.आधी मूली का रस दोपहर के समय मधुमेह (डायबिटीज) के रोगी को देने से लाभ होता है.
पीलिया (कामला, पाण्डु) : एक कच्ची मूली रोजाना सुबह सोकर उठने के बाद ही खाते रहने से कुछ ही दिनों में ही पीलिया रोग ठीक हो जाता है.
पेशाब के समय जलन व दर्दः आधा गिलास मूली के रस का सेवन करने से पेशाब के साथ होने वाली जलन और दर्द मिट जाता है.
पेशाब कम बननाः गुर्दे की खराबी से यदि पेशाब का बनना बंद हो जाए तो मूली का रस 50 मिलीलीटर रोजाना पीने से पेशाब फिर बनने लगता है.
पेट में दर्दः 1 कप मूली के रस में नमक और मिर्च डालकर सेवन करने से पेट साफ हो जाता है और पेट का दर्द भी दूर हो जाता है.
मूली का लगभग 1 ग्राम के चौथे भाग के रस में आवश्यकतानुसार नमक और 3-4 कालीमिर्च का चूर्ण डालकर 3-4 बार रोगी को पिलाने से पेट के दर्द में लाभ मिलता है.
हिचकीः मूली के कोमल पत्ते चबाकर रस चूसने से हिचकी तुरन्त बंद हो जाती है. मूली का रस हल्का-सा गर्म करके पीने से भी हिचकी बंद हो जाती है.
आंतों के रोगः मूली का रस आंतों में एण्टीसैप्टिक का कार्य करता हैं.
पथरीः 30 से 35 ग्राम मूली के बीजों को आधा लीटर पानी में उबाल लें. जब पानी आधा शेष रह जाए तब इसे छानकर पीएं. यह प्रयोग कुछ दिनों तक करने से मूत्राशय की पथरी चूर-चूर होकर पेशाब के साथ बाहर आ जाएगी. यह प्रयोग 2 से 3 महीने निरन्तर जारी रखें. मूली का रस पीने से पित्ताशय की पथरी बनना बंद हो जाती है.
बिच्छू के काटने परः मूली के टुकड़े पर नमक लगाकर बिच्छू के काटे स्थान पर रखने से दर्द शांत होता है. बिच्छू के काटे रोगी को मूली खिलाएं और पीड़ित स्थान पर भी मूली का रस लगाने से लाभ होता है.