चाणक्य कोट्स इन हिंदी चाणक्य की अनमोल वचन
- ऋण, शत्रु और रोग को समाप्त कर देना चाहिए।
- वन की अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है अर्थात दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकते है।
- शत्रु की दुर्बलता जानने तक उसे अपना मित्र बनाए रखें।
- सिंह भूखा होने पर भी तिनका नहीं खाता।
- एक ही देश के दो शत्रु परस्पर मित्र होते है।
- आपातकाल में स्नेह करने वाला ही मित्र होता है।
- मित्रों के संग्रह से बल प्राप्त होता है।
- जो धैर्यवान नहीं है, उसका न वर्तमान है न भविष्य।
- संकट में बुद्धि ही काम आती है।
- लोहे को लोहे से ही काटना चाहिए।
- यदि माता दुष्ट है तो उसे भी त्याग देना चाहिए।
- यदि स्वयं के हाथ में विष फ़ैल रहा है तो उसे काट देना चाहिए।
- सांप को दूध पिलाने से विष ही बढ़ता है, न की अमृत।
- एक बिगड़ैल गाय सौ कुत्तों से ज्यादा श्रेष्ठ है। अर्थात एक विपरीत स्वाभाव का परम हितैषी व्यक्ति, उन सौ लोगों से श्रेष्ठ है जो आपकी चापलूसी करते है।
- कल के मोर से आज का कबूतर भला। अर्थात संतोष सब बड़ा धन है।
- आग सिर में स्थापित करने पर भी जलाती है। अर्थात दुष्ट व्यक्ति का कितना भी सम्मान कर लें, वह सदा दुःख ही देता है।
- भूख के समान कोई दूसरा शत्रु नहीं है।
- विद्या को चोर भी नहीं चुरा सकता।
Labels: ANMOL VACHAN