समुद्र के बीचों बीच होने के बाबजूद क्यों एक बूंद पानी भी हाजी अली
हाजी अली दरगाह देश के उन पवित्र स्थलों में से एक है जहां जाने वाले का न तो मजहब देखा जाता है न पहचान. मुम्बई में बनी हाजी अली शाह की दरगाह से जुड़े चमत्कारों के किस्से देश के हर कोने में सुनने को मिल जाएंगे. सवाल है कि समुद्र में बने होने के बाबजूद हाजी अली दरगाह डूबती क्यों नहीं है? चूंकि सवाल है तो जवाब भी है और इस अज्ञात रहस्य का जवाब ही आज का हमारा विषय है.
हाँ अलौकिक शक्तियों का वजूद है-
एक मजार जो समुद्र में 500 गज अंदर तक बनी है, आने-जाने के लिए पुल निर्मित है, समुद्र में ज्वार आते हैं, पुल जलमग्न रहता है पर दरगाह के भीतर एक बूंद पानी भी नहीं. क्या ये सम्भव है? विज्ञान के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं पर धर्म कर इतिहास के पास है. कहते हैं कि जब हाजी अली शाह व्यापार के लिए निकले तो भारत भी आए और मुंबई, वर्ली के इसी इलाके में उनका निवास था. व्यापार के दौरान उनका संसार से मोहभंग हुआ और धर्म में वो रम गए. तब हाजी अली शाह ने निर्णय लिया कि वो अपना शेष जीवन भारत मे धर्म प्रचार में व्यतीत करेंगे. माँ को खत लिखकर अपने निर्णय की जानकारी दी और अपना सब धन-धान्य दान कर यात्रा का प्रारंभ किया. हाजी अली शाह बुखारी सबसे पहले हज यात्रा पर निकले लेकिन इसी दौरान उनकी म्रत्यु हो गयी. मान्यता है कि उनका अंतिम संस्कार अरब में ही होना था मगर ताबूत अरब सागर से बहता हुआ मुम्बई के इसी क्षेत्र में आ गया और तब लोगों ने चमत्कार देखा.
ताबूत के अंदर न तो एक बूंद पानी गया था न ही वो डूबा था. आस्थावान लोगों ने निर्णय लिया और इसी टापू पर उनकी मजार बनाई गई. कहते हैं हाजी अली शाह की अदब के चलते आज भी समुंदर अपनी मर्यादा नहीं तोड़ता.