महाभारत के युद्ध मे मारे गए एक भी योद्धा का शव या कंकाल आजतक क्यों नहीं मिला, जानिए रहस्य
कुरुक्षेत्र की भूमि पर हज़ारों वर्ष पूर्व धर्म और अधर्म के बीच युद्ध का आव्हान हुआ था. करोड़ों की संख्या में दोनों ही पक्षों के योद्धा, रणभूमि में उतरे. एक तरफ ययुधिष्ठिर और उनके चार भाईयों का साथ खुद भगवान कृष्ण दे रहे थे दूसरी तरफ कौरव सेना में एक से बढ़कर एक भीष्म पितामह, कर्ण, गुरु द्रोण, दुर्योधन, अश्वत्थामा जैसे अनेकों महारथी योद्धा थे.
युद्ध मे किस हद तक विनाश हुआ था इस बात का अंदाज़ा इस एक तथ्य से लगा सकते हैं कि इतना रक्त महाभारत में बहा था कि आज भी कुरुक्षेत्र की मिट्टी लाल है. पर सवाल यह है कि जब इस हद तक विध्वंस हुआ था तो आज तक युद्ध से जुड़े एक भी योद्धा का शव या कंकाल आदि क्यों नहीं मिला?
जबाब उस समय की युद्ध नीति में है, दरअसल आज शत्रु की मौत के बाद भी उसके साथ कई बार बर्बरता के किस्से पढ़ने को मिल जाते हैं तब ऐसा नहीं था, शत्रु हो या मित्र एक योद्धा के शव का ससम्मान अंतिम संस्कार किया जाता था, प्रतिदिन सूर्यास्त के बाद युद्ध विराम की घोषणा की जाती और दोनों ही पक्ष के मृत योद्धाओं का अंतिम संस्कार किए जाते यही वजह है कि आजतक महाभारत के किसी भी योद्धा का शव नहीं मिल सका.
कुछ स्थानों पर ऐसा भी वर्णन है कि युद्ध के बाद कुरुक्षेत्र की भूमि को जला दिया गया था ताकि शेष योद्धाओं के शव जो युद्धभूमि मे ही क्षित विक्षित अवस्थी में रह गए थे वो भी मुक्ति को प्राप्त हों.हरदिन जानें कुछ असाधारण रहस्य, लेटेस्ट अप्डेट्स के लिए हमें सब्सक्राइब जरुर करे