जानिए टीपू सुल्तान की मौत का रहस्य -tipu sultan death history in hindi
टीपू सुल्तान की जयंती को लेकर आजकल देश में माहौल गरमाया हुआ है, इस बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जो टीपू के बारे में कुछ नहीं जानते तो आज का हमारा विषय टीपू सुल्तान पर ही केंद्रित है, विषय का प्रमुख आधार है टीपू की विचित्र म्रत्यु. तो कृपया अंत तक पढ़ें, जानकारी अच्छी लगे तो इसे शेयर जरूर करें.
टीपू सुल्तान एक महत्वाकांक्षी योद्धा-टीपू सुल्तान इतिहास
सबसे पहली बात की टीपू सुल्तान का वास्तविक नाम सुल्तान फतेह अली खान था. टीपू साम्राज्य के बारे में अपने पिता हैदर अली के जैसी ही विचारधारा रखता था. हैदर अली जो कि मैसूर साम्राज्य के सेनापति थे और अपनी महत्वाकांक्षाओं के चलते बाद में उसी साम्राज्य के सम्राट बने, हैदर अली ने अपने समान ही पुत्र को जन्म दिया था. टीपू की साम्राज्य के लिए महत्वाकांक्षा अपने पिता की तरह ही थी मगर योजनाएं, रणकौशल और हिम्मत पिता से कई गुना अधिक थी.
टीपू के चरित्र के बारे में दो राय बनतीं हैं, एक के अनुसार वह कट्टर मुसलमान था और दूसरी के मुताबिक वह कट्टर मुसलमान के साथ ही बाकी धर्मों की भी अवहेलना नहीं करता था. उदाहरण स्वरूप उसके साम्राज्य के मंदिरों आदि को उसने दान भी किए जिसके प्रमाण मिलते हैं(हम सत्यता का दावा नहीं कर सकते).
टीपू आज से लगभग 300 वर्ष पहले युद्ध में रॉकेट्स, मिसाइल जैसे अस्त्रों का प्रयोग करता था जो उसकी युद्धनीति को बाकी सारे संसार से अलग बनातीं थी.
मगर टीपू सुल्तान मरा कैसे?
4 जनवरी 1799 को श्रीरंगपट्टना में अंग्रेज और टीपू की सेनाएं युद्ध कर रहीं थीं. इतिहासकारों के मुताबिक उस युद्ध में अंग्रेज सेना को टीपू की हर अगली चाल का पता था और कहते हैं कि उसका सेनापति अंग्रेजों से मिल गया था. श्रीरंगपट्टना के युद्ध में मात्र 48 वर्ष की आयु में टीपू सुल्तान की म्रत्यु हो गयी. यह म्रत्यु इसलिए भी विचित्र कही जाती है क्योंकि अंग्रेजों ने पहले तो खत लिखकर उससे युद्ध का आवाहन किया फिर टीपू ने जब उनसे युद्ध के लिए समय मांगा तो अचानक ही हमला कर दिया. टीपू उस समय अंग्रेजों की पनपती ईस्ट इंडिया कम्पनी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा था जिसे आखिरकार उन्होंने खत्म कर ही दिया. सुल्तान की मौत के बाद उसकी तलवार और रॉकेट्स आदि जैसी सामग्री अंग्रेज अपने साथ ले गए थे.
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